वायुशक्तिः पोखरण में राफेल, सुखोई व जगुआर लड़ाकू विमानों की गर्जना, राष्ट्रपति मुर्मु हुईं शामिल
नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय वायुसेना ‘वायुशक्ति’ का जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। वायुसेना का यह प्रदर्शन पाकिस्तान बॉर्डर के समीप पोखरण रेंज में शुरू किया गया है।
यहां ‘वायुशक्ति–26’ नाम से यह बड़ा युद्धाभ्यास प्रारंभ किया गया है। शुक्रवार शाम प्रारंभ हुए इस युद्धाभ्यास के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उपस्थित रहीं। उनके साथ वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे। इस अभ्यास में हाल के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता का भी जिक्र शामिल है। इससे यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारतीय वायुसेना हवा में अपना दबदबा बनाने और लंबी दूरी तक सटीक वार करने में पूरी तरह सक्षम है।
युद्धाभ्यास के दौरान पहले दिन 18 महत्वपूर्ण टार्गेट सेट किए गए थे। इनमें टेररिस्ट कैंप, दुश्मन की हवाई पट्टी, पेट्रोलियम भंडार, रडार, बंकर, टैंकों का काफिला, संचार केंद्र, रसद केंद्र व सैन्य वाहनों का काफिला आदि शामिल थे। युद्धाभ्यास के दौरान वायुसेना के शूरवीरों ने बेहद सटीक तरीके से इन टारगेट को ध्वस्त कर दिया। इस युद्धाभ्यास में भारत के बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 का भी जिक्र है। एस-400 कई किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों व मिसाइलों को मार गिराता है।
दरअसल, इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत और तैयारी का प्रदर्शन किया। एक खास बात यह भी है कि यह अभ्यास दिन, सांझ और रात तीनों परिस्थितियों में संचालित हो रहा है। अलग-अलग मिशनों के जरिए वायुसेना चौबीसों घंटे की युद्ध तत्परता को दर्शा रही है। यह अभ्यास इतना व्यापक है कि इसमें 120 से ज्यादा एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इस युद्धाभ्यास में कई लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं। इनमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, मिराज-2000, जगुआर जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं।
वहीं सी-17, सी-130 जे और सी-295 जैसे बड़े ट्रांसपोर्ट विमान भी यहां उड़ान भर रहे हैं। लड़ाकू विमानों के अलावा वायुसेना के अपाचे हेलिकॉप्टर, चिनूक हेलीकॉप्टर, एलसीएच, एमआई-17 जैसे हेलीकॉप्टर और आधुनिक ड्रोन भी अभ्यास का हिस्सा बने हैं। युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति’ में आधुनिक हथियारों का भी उपयोग किया जा रहा है। यहां आकाश मिसाइल व स्पाइडर एयर डिफेंस सिस्टम अपनी मारक क्षमता का परिचय देते हुए नजर आएंगे। शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। एक ओर जहां ऐसे घातक व युद्धक हथियार हैं, वहीं दूसरी ओर इन बेहद घातक हथियारों की मौजूदगी के बीच वायुसेना मानवीय सहायता की दक्षता का परिचय देगी। वायुसेना दिखाएगी कि कैसे आपदा या संकट के समय भी देशवासियों के लिए मौजूद रहती है। संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने का काम करती है।
गौरतलब है भारतीय वायुसेना सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे प्रचंड जवाब देने वाली शक्ति के रूप में जानी जाती है। वायुसेना के मुताबिक अभ्यास में यह भी दिखाया जा रहा है कि वह विदेश के संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी त्वरित एयरलिफ्ट, बचाव और निकासी (रेस्क्यू एवं इवैक्यूएशन) अभियान चलाने की क्षमता रखती है। वायुसेना के इस महत्वपूर्ण अभ्यास में सी-17, सी-130 जे और सी-295 जैसे बड़े ट्रांसपोर्ट विमान उड़ान भरते दिखाई देंगे। ‘वायुशक्ति–26’ के जरिए वायुसेना देश को यह भरोसा दिला रही है कि वह हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। वायुसेना दिखला रही है कि उसका वार अचूक, अभेद्य और सटीक है। वहीं चूंकि यह अभ्यास भारत-पाकिस्तान सीमा के समीप आयोजित हो रहा है, इसलिए नियम के अनुसार नोटम भी जारी किया गया है।
--आईएएनएस
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