स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आवाज दबाने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत आरोप लगाया गया : सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आवाज दबाने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत आरोप लगाया गया : सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आवाज दबाने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत आरोप लगाया गया : सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा

Published on

लखनऊ, 27 फरवरी (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इस बीच समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने शुक्रवार को सरकार पर जानबूझकर फर्जी मुकदमों में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया।

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, शंकराचार्य जी की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर फर्जी, झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाया गया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सरकार शंकराचार्य जी की आवाज दबाने के लिए उन्हें गिरफ्तार करना चाहती थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगाकर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट के इस निर्णय का हम सभी लोग स्वागत करते हैं।

सत्य को कोई भी हरा नहीं सकता। शंकराचार्य जी करोड़ों हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं। उनकी गिरफ्तारी का प्रयास लोकतंत्र और सनातन धर्म पर क्रूर हमला था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य जी को झूठा बदनाम करने के लिए उन पर जो फर्जी मुकदमा लगाया था, हाईकोर्ट के स्टे के बाद साबित हो गया कि सरकार उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम करना चाहती है। 11 मार्च को वे लखनऊ संतों के साथ आना चाहते थे, इसलिए उन्हें लखनऊ आने से रोकने की साजिश थी। हाईकोर्ट ने विफल करने का काम किया है।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जमानत का विरोध करते हुए अदालत को पॉक्सो मामले की गंभीरता से अवगत कराया और कहा कि याचिकाकर्ता को पहले निचली अदालत का रुख करना चाहिए था। वहीं, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि पूरा मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

बचाव पक्ष ने कहा कि आरोप निराधार हैं और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दायर अर्जी के बाद दर्ज हुआ। जिला अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिग बटुकों से दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रकरण पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है और विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की अदालत के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की गई।

--आईएएनएस

एससीएच/एमएस

logo
NewsGram
www.newsgram.com