मध्य प्रदेश : भूपेंद्र यादव ने भोपाल में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की मीटिंग की
मध्य प्रदेश : भूपेंद्र यादव ने भोपाल में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की मीटिंग की

मध्य प्रदेश : भूपेंद्र यादव ने भोपाल में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की मीटिंग की

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भोपाल, 28 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को मध्य प्रदेश के भोपाल में नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की स्टैंडिंग कमेटी की 89वीं मीटिंग की अध्यक्षता की, जिसमें वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया।

बयान में कहा गया, "स्टैंडिंग कमेटी ने वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के नियमों के मुताबिक प्रोटेक्टेड एरिया, वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, टाइगर रिजर्व और इको-सेंसिटिव जोन में और उसके आस-पास के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर भी चर्चा की।"

इकोलॉजिकल सेंसिटिविटी, कानूनी जरूरतों और तय बचाव के उपायों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों की जांच की गई।

कमेटी ने आगे कहा, "कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, पावर ट्रांसमिशन लाइन, रोड प्रोजेक्ट, पीने के पानी की सप्लाई, थर्मल पावर, डिफेंस, सिंचाई और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर में कुल 58 नए प्रस्तावों पर विचार किया गया।"

कमेटी ने जरूरी पॉलिसी मामलों पर भी विचार-विमर्श किया, जिसमें डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे पानी वाले जानवरों के बचाव के लिए चंबल नदी में एनवायर्नमेंटल फ्लो (ई-फ्लो) बनाए रखने की इकोलॉजिकल अहमियत, टाइगर रिजर्व के अंदर गांवों के सामाजिक, आर्थिक और इकोलॉजिकल पहलुओं की स्थिति, वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट के लिए घास के मैदानों की अहमियत और इंसान-तेंदुआ इंटरफेस की मौजूदा चुनौतियों को मैनेज करने की स्ट्रेटेजी शामिल हैं।

मीटिंग में साइंटिफिक और टेक्निकल इंस्टीट्यूशन्स को शामिल करने पर भी जोर दिया गया, जिसमें वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन और सेंट्रल वॉटर कमीशन शामिल हैं, ताकि यह पक्का किया जा सके कि कंजर्वेशन पॉलिसीज को मजबूत रिसर्च और इंटर-सेक्टरल कोऑर्डिनेशन से सपोर्ट मिले।

बयान में कहा गया, "नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी एक कानूनी संस्था है जिसे वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत बनाया गया है और इसका काम केंद्र सरकार को वाइल्डलाइफ और जंगलों के कंजर्वेशन और प्रोटेक्शन से जुड़े मामलों पर सलाह देना है, साथ ही यह पक्का करना है कि प्रोटेक्टेड एरिया में और उसके आस-पास डेवलपमेंट एक्टिविटीज सस्टेनेबल और बैलेंस्ड तरीके से की जाएं।"

--आईएएनएस

एससीएच

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