मुर्शिदाबाद सीट पर तृणमूल अब तक बेअसर, हमेशा विरोधी पार्टी को मिलती रही है जीत
मुर्शिदाबाद सीट पर तृणमूल अब तक बेअसर, हमेशा विरोधी पार्टी को मिलती रही है जीत

मुर्शिदाबाद सीट पर तृणमूल अब तक बेअसर, हमेशा विरोधी पार्टी को मिलती रही है जीत

Published on

मुर्शिदाबाद, 1 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का दबदबा है और 2011 से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्ता पर काबिज है, लेकिन उनके लिए मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र आज भी चुनौती है। यहां का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि जनता ने कभी तृणमूल कांग्रेस को मुर्शिदाबाद में जीत का अवसर नहीं दिया। वर्तमान में यह सीट भाजपा के कब्जे में हैं।

मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है। परिसीमन आयोग के आदेशों के अनुसार, क्रमांक 64 मुर्शिदाबाद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मुर्शिदाबाद नगरपालिका, जियागंज अजीमगंज नगरपालिका और मुर्शिदाबाद जियागंज सामुदायिक विकास खंड शामिल हैं। मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र, 11 मुर्शिदाबाद (लोकसभा क्षेत्र) का हिस्सा है।

नवाब मुर्शिद कुली खान के शासनकाल में मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी हुआ करता था। अंग्रेजों के आगमन से पहले मुर्शिदाबाद शहर बंगाल की राजधानी था। भारतीय इतिहास में इसका विशेष महत्व है, क्योंकि 1757 में प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों ने सिराज-उद-दौला को हराया था, जिसके बाद पूरा देश ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन आ गया था। अंग्रेजों की ओर से बंगाल पर विजय प्राप्त करने के बाद भी मुर्शिदाबाद कुछ समय तक प्रशासन का केंद्र बना रहा।

यह शहर आज भी नवाबों की यादों को संजोए हुए है, जिनमें मस्जिदें, मकबरे और उद्यान शामिल हैं। यहां हाथीदांत की नक्काशी, सोने-चांदी की कढ़ाई और रेशम बुनाई जैसे उद्योग आज भी हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों में निजामत किला (नवाबों का किला), जिसे हजारद्वारी महल के नाम से भी जाना जाता है, मोती झील, मुरादबाग महल, कटरा मस्जिद, निजामत इमामबाड़ा, मदीना मस्जिद और नशीपुर पैलेस शामिल हैं। मुर्शिदाबाद आज कृषि, हस्तशिल्प और रेशम उत्पादन का केंद्र है।

राजनीति की बात करें तो मुर्शिदाबाद में 1951 से विधानसभा सीट मौजूद है। अब तक हुए 17 चुनावों में यहां की राजनीति में अक्सर उलटे ट्रेंड देखने को मिले हैं, जहां सत्ताधारी पार्टी के बजाय विरोधी पार्टियां विजयी रही हैं। खासतौर पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा है, जिसने यहां 1951 से 1972 तक छह बार जीत हासिल की। 1962 में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के अलावा, लेफ्ट फ्रंट और फॉरवर्ड ब्लॉक ने भी यहां चुनावी सफलता प्राप्त की है। हाल ही में 2021 में भाजपा ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस यहां कभी नहीं जीत सकी, इसके बावजूद कि यह सीट राज्य में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुकी है।

--आईएएनएस

डीसीएच/वीसी

Subscribe to our channels on YouTube and WhatsApp 

logo
NewsGram
www.newsgram.com