पंच महाभूत और त्रिदोष: आयुर्वेदा के सिद्धांतों से जानें जीवनशैली में सही संतुलन का मंत्र 
Health

पंच महाभूत और त्रिदोष: आयुर्वेद के सिद्धांतों से जानें जीवनशैली में सही संतुलन का मंत्र

IANS

नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। जीवन और प्रकृति का संतुलन पंच महाभूतों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पर आधारित है। ये पांच तत्व न सिर्फ ब्रह्मांड की संरचना को बनाते हैं, बल्कि हमारे शरीर और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद में शरीर को एक छोटे ब्रह्मांड की तरह देखा गया है और यही कारण है कि इसमें त्रिदोष – वात, पित्त और कफ का महत्व है। तीनों त्रिदोष पंच महाभूतों के मिश्रण से बनते हैं।

ये तीनों हमारे शरीर की प्रमुख शारीरिक और मानसिक कार्यप्रणालियों को नियंत्रित करते हैं और यदि इनमें से किसी का भी असंतुलन हो जाए, तो शरीर में विकार और बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।

उदाहरण के लिए, वात में आकाश और वायु का प्रभाव होता है, जो शरीर में गति, संचार और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है। अगर वात असंतुलित हो जाए, तो शरीर में बेचैनी, चक्कर, दर्द या मानसिक तनाव जैसे लक्षण हो सकते हैं। पित्त, जो अग्नि और जल के मिश्रण से बनता है, शरीर के पाचन, तापमान नियंत्रण और ऊर्जा उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। जब पित्त असंतुलित होता है, तो यह अपच, त्वचा की समस्याएं और अत्यधिक गुस्से की स्थिति पैदा कर सकता है। कफ, जो जल और पृथ्वी के तत्वों से बनता है, शरीर में बल, स्थिरता और शीतलता का काम करता है। कफ का असंतुलन शारीरिक थकावट, मोटापा और नाक में जाम जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।

एक स्वस्थ शरीर और मन का निर्माण तभी संभव है, जब त्रिदोष सही संतुलन में हों। अगर इनमें से कोई भी दोष असंतुलित हो जाए, तो आयुर्वेद में इसे विकार कहा जाता है, जो बीमारी का कारण बन सकता है। इसलिए आयुर्वेद में जीवनशैली, आहार और दिनचर्या के महत्व को बहुत अधिक माना गया है।

आयुर्वेद के अनुसार, हर व्यक्ति की त्रिदोष की संरचना अलग होती है, जो उसे जन्म के समय या विकास के दौरान प्राप्त होती है, जिसे 'प्रकृति' कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि हर किसी का शारीरिक और मानसिक संतुलन अलग-अलग होता है और इसी के अनुसार उसे अपने आहार और दिनचर्या को ढालने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का पित्त दोष अधिक है, तो उसे ठंडे और ताजे आहार का सेवन करना चाहिए, जबकि जिनका वात दोष अधिक है, उन्हें गर्म और तैलीय आहार से बचना चाहिए।

आयुर्वेद में स्वास्थवृत्त या आदर्श जीवनशैली का पालन करने के लिए, व्यक्ति को न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण मानना चाहिए। सही आहार, नियमित दिनचर्या और शारीरिक व्यायाम के साथ-साथ मानसिक शांति और संतुलन भी जरूरी है। आयुर्वेद में सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम के अनुसार भी आहार और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है ताकि त्रिदोष संतुलित रहे।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

Hundreds killed in US-Israel attacks; Supreme Leader Khamenei and President Pezeshkian safe: Iranian Envoy

US, Israel Launch Major Strike on Iran; UAE, Qatar, Jordan and Other Middle East Countries Caught in the Crossfire

“Who Committed the Mistake of Giving You a License?”: CJI Pulls Up Lawyer for Filing FIR Against PM Modi and Amit Shah in Connection with CAA

WhatsApp Tells SC it will Comply with CCI Order on User Data Privacy, Argues Against Blanket Ban on Data Sharing

Gauhati High Court Issues Notice to CM Himanta Biswa Sarma Over Hate Speech Petition, Remarks on “Fissiparous Tendency”