श्रीनगर, 28 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर ईरान में बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच वहां रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा, शैक्षिक संरक्षण और संभावित निकासी सुनिश्चित करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में जेकेएसए ने संघर्ष की स्थिति में अस्थिर और जानलेवा सुरक्षा हालातों पर चिंता जताई। जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नसीर खुहेामी ने कहा कि तेजी से बदलती सुरक्षा स्थिति ने विदेशी नागरिकों, खासकर ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए डर, अनिश्चितता और गंभीर जोखिम का माहौल पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि अधिकतर छात्र कश्मीर घाटी से हैं, जो ईरानी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, खासकर एमबीबीएस और संबद्ध चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे हैं। जेकेएसए ने यह भी बताया कि छात्रों को अब एक अस्थिर सुरक्षा परिदृश्य का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सीमित आवाजाही, संचार में अनिश्चितताएं व संघर्षों के और बढ़ने का खतरा शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि बढ़ते तनाव को देखते हुए 23 फरवरी को भारतीय नागरिकों से ईरान छोड़ने का आग्रह करते हुए सलाह जारी की गई थी। ईरान के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय की देखरेख में 5 मार्च को परीक्षाएं होनी हैं। ये परीक्षाएं मेडिकल शिक्षा के लिए अहम पड़ाव हैं और शैक्षिक प्रगति के लिए बहुत जरूरी हैं। छात्रों को डर है कि अगर वे इस समय देश छोड़ते हैं, तो उनके शैक्षिक भविष्य पर विपरीत असर पड़ सकता है और सालों की मेहनत बेकार हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप, कई छात्र एक गंभीर स्थिति में फंसे हुए हैं, जहां उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा और शैक्षिक निरंतरता के बीच चयन करना पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने कहा कि कश्मीर में माता-पिता और परिवारों की मानसिक स्थिति भी उतनी ही चिंताजनक है, जो घटनाक्रम को देखते हुए बेचैन हैं और अपने बच्चों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। परिवारों पर इसका मानसिक दबाव बहुत ज्यादा है और मौजूदा अनिश्चितता ने उनके डर को और बढ़ा दिया है।
जेकेएसए के ईरान कोऑर्डिनेटर, फैजान नबी ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे विदेश मंत्रालय, तेहरान में भारतीय दूतावास, ईरानी अधिकारियों और संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच त्वरित और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो, तो पड़ोसी देशों के जरिए निकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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