उपराष्ट्रपति ने केरलम के त्रिशूर में रखी 
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उपराष्ट्रपति ने केरलम के त्रिशूर में रखी 'चेतना गणाश्रम' की आधारशिला, बोले- भारत का संगीत एक आध्यात्मिक यात्रा

IANS

त्रिशूर, 1 मार्च (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को केरलम के त्रिशूर में 'चेतना गणाश्रम' की नींव रखी। यह सभी धर्मों के लोगों की आध्यात्मिक जागृति के लिए एक सांस्कृतिक और संगीत परिसर है।

'चेतना गणाश्रम', कुरियाकोस एलियास सर्विस सोसाइटी (केईएसएस) का एक प्रोजेक्ट है और सीएमआई देवमाथा पब्लिक स्कूल, त्रिशूर की एक पहल है।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में हजारों साल पुरानी एक समृद्ध संगीत परंपरा है। भारत का संगीत सिर्फ आवाज नहीं है। यह एक आध्यात्मिक यात्रा, एक ध्यान, एक प्रार्थना और जीवन का उत्सव है। उन्होंने संगीत को भारत की पुरानी सभ्यता की आत्मा की सबसे शुद्ध अभिव्यक्ति बताया और कहा कि यह एक शक्तिशाली सूत्र है, जो लाखों दिलों को एक लय में पिरोता है।

उन्होंने कहा कि वेदों के भजनों से लेकर संतों की भक्ति तक, संगीत पूरे देश में पवित्र गंगा की तरह बहता रहा है। उपराष्ट्रपति ने पुराने दक्षिण भारत की जीवंत संगीत संस्कृति के ऐतिहासिक सबूतों का भी जिक्र किया, जिसमें चोल राजाओं की ओर से बनाए गए बृहदीश्वर मंदिर में लिखे शिलालेख शामिल हैं, जिनमें सैकड़ों संगीतकारों और नर्तकों की नियुक्ति का उल्लेख करते हैं। उन्होंने कहा कि भजन मंदिरों में नियमित रूप से गाए जाते थे, जो भारत की संगीत परंपरा की शाश्वतता को दर्शाते हैं।

भारत की विविध संगीत परंपराओं के बारे में बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत को ध्वनि का गहन विज्ञान बताया। उन्होंने त्यागराज की अमर रचनाओं, तानसेन की प्रतिभा और एमएस की दिव्य आवाज को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी और रवि शंकर के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत ने विभिन्न महाद्वीपों के श्रोताओं को प्रेरित किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी या भारतीय, सभी संगीत सात स्वरों पर आधारित हैं और सप्त स्वर मानवीय भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हैं, श्वास को नियंत्रित करते हैं, हृदय गति को स्थिर करते हैं, तनाव कम करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, "जब भोर में कोई सुंदर राग बहता है या किसी पवित्र स्थल में भजन गूंजता है, तो संगीत औषधि बन जाता है।"

उपराष्ट्रपति ने चेतना गणाश्रम के पर्यावरण-अनुकूल संगीत परिसर के रूप में संगीत ध्यान और चिकित्सा के प्रति समर्पित दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि सात स्वर विविधता में एकता का प्रतीक हैं, प्रत्येक अलग होते हुए भी सामंजस्यपूर्ण हैं और मानवता के लिए एक गहरा संदेश देते हैं।

उन्होंने 'गणाश्रम' के समावेशी प्रबंधन की प्रशंसा की, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लोग शामिल हैं, जिनमें गायक केजे येसुदास जैसी प्रख्यात हस्तियां भी शामिल हैं, और संगीत और ध्यान की आध्यात्मिक छत्रछाया में लोगों को एक साथ लाने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग की प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को अभूतपूर्व वैश्विक पहचान मिली है और यह भारत की सॉफ्ट पावर के प्रतीक के रूप में उभरा है, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संगीत परंपराओं के आदान-प्रदान के लिए जीवंत मंच तैयार किए हैं, जिससे विविधता में एकता मजबूत हुई है और भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए वैश्विक सराहना बढ़ी है।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज की तेज और तनावपूर्ण जीवनशैली में संगीत की उपचारात्मक शक्ति पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने चेतना गणाश्रम की सफलता की कामना की और उम्मीद जताई कि 'सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी' की शाश्वत तरंगें हृदयों को सुकून देती रहेंगी और मानवता को सद्भाव की ओर ले जाएंगी।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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