सरोजिनी नायडू: ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ ने शब्दों से जगाई राष्ट्रभावना, संघर्ष से रचा इतिहास 
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सरोजिनी नायडू: ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ ने शब्दों से जगाई राष्ट्रभावना, संघर्ष से रचा इतिहास

IANS

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू ने अपनी काव्य प्रतिभा से भारतीय संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्रवाद को जीवंत किया। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में अडिग साहस दिखाया। उनकी कविताओं में भावुकता, लय और जीवंत चित्रण इतना गहरा था कि महात्मा गांधी ने उन्हें 'भारत कोकिला' कहा था।

सरोजिनी नायडू की 2 मार्च को पुण्यतिथि है। वह मात्र 12 साल की उम्र में कविताएं लिखना शुरू कर चुकी थीं और उनके हर शब्द में क्रांति की गूंज थी। आधुनिक भारतीय इतिहास में सरोजिनी नायडू बुद्धि, वाक्पटुता और कर्मठता का दुर्लभ संगम थीं। वे एक महान कवयित्री, राष्ट्रवादी नेता और महिलाओं के अधिकारों की प्रबल समर्थक रहीं।

उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई और सामाजिक सुधारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनकी लेखन शैली ब्रिटिश रोमांटिक परंपरा से प्रभावित थी, जिसमें ब्रिटिश रोमांटिक कवियों की तरह काव्यात्मक गुणवत्ता, समृद्ध इमेजरी, संवेदनशीलता और संगीतमय लय थी। वह अंग्रेजी में लिखती थीं, लेकिन उनकी कविताओं में भारतीय जीवन, बाजारों की रौनक, प्रकृति की सुंदरता और आम लोगों की भावनाएं जीवंत हो उठती थीं।

उनकी भाषा सरल, भावपूर्ण और संवेदनशील थी, जिसमें अलंकार, रूपक और ध्वन्यात्मकता का खूबसूरत इस्तेमाल होता था। हर पंक्ति में भारतीयता की गंध और स्वतंत्रता की पुकार साफ झलकती थी। इन्हीं खूबियों को देखते हुए महात्मा गांधी ने उन्हें 'भारत की कोकिला' कहा था।

उनकी प्रमुख रचनाओं पर नजर डालें तो उनमें 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' है, जो उनकी पहली काव्य संग्रह है। इसमें भारतीय जीवन की सादगी और सुंदरता को चित्रित किया गया। यह उनके घर के नाम पर रखा गया। दूसरी रचना का नाम 'द बर्ड ऑफ टाइम: सॉन्ग्स ऑफ लाइफ, डेथ एंड द स्प्रिंग" है, जिसमें राष्ट्रवादी भावनाएं प्रमुख हैं, जैसे प्रसिद्ध कविता 'इन द बाजार्स ऑफ हैदराबाद' जो स्वदेशी आंदोलन को प्रेरित करती है।

उनकी रचनाओं में द ब्रोकन विंग: सॉन्ग्स ऑफ लव, डेथ एंड डेस्टिनी भी है, जो प्रेम, मृत्यु और भाग्य पर केंद्रित है और भावुकता की गहराई भी है। द सेप्टर्ड फ्लूट: सॉन्ग्स ऑफ इंडिया, उनके संग्रहित काव्यों का संकलन, जिसमें भारतीय परंपरा और भावनाओं का मिश्रण है और द फेदर ऑफ द डॉन है, जो उनके अन्य काव्यों का संग्रह है।

इन रचनाओं की खासियत यह है कि वे भारतीय संस्कृति, दैनिक जीवन, प्रकृति और राष्ट्रप्रेम को रोमांटिक अंदाज में पेश करती हैं। उनकी कविताएं जैसे 'पलान क्वीन बियर्स', 'कॉरोमंडल फिशर्स', 'इंडियन वीवर्स' और 'क्रैडल सॉन्ग' में आम भारतीयों की जिंदगी को संवेदनशीलता से दिखाया गया है। हर शब्द में क्रांति की भावना थी, चाहे वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ हो या महिलाओं की मुक्ति के लिए। राजनीतिक जीवन में भी वह अग्रणी रहीं।

1925 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं। 1924 में पूर्वी अफ्रीका में भारतीय कांग्रेस में भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद वे संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) की पहली महिला राज्यपाल बनीं और संविधान सभा में राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, अधिकार और लैंगिक समानता के लिए काम किया। उनका मानना था कि "विश्व-सभ्यता के आगे बढ़ने का समय आ गया है, जब देश सेवा में लैंगिक भेदभाव नहीं होना चाहिए।"

उन्होंने कविता के माध्यम से क्रांति जगाई और संघर्ष से भारत को नई दिशा दी। आज भी उनकी रचनाएं और विचार प्रेरणा स्रोत हैं।

--आईएएनएस

एमटी/वीसी

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