स्पेस से दिखने वाली पृथ्वी की अनोखी चमक 
National News

स्पेस से दिखने वाली पृथ्वी की अनोखी 'एयरग्लो', जानें क्या कहते हैं वैज्ञानिक

IANS

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। अंतरिक्ष से पृथ्वी की कल्पना करते ही अक्सर हमारे मानस पटल पर 'नीले ग्रह' की सुंदर तस्वीरें उभरती हैं। हालांकि, पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से देखने पर एक अद्भुत नजारा दिखाई देता है। पृथ्वी से महज 300 मील की ऊंचाई पर ऊपरी वायुमंडल में लाल, हरी, बैंगनी और पीली रोशनी की चमकीली परतें नजर आती हैं। वैज्ञानिक शब्दावली में इसे 'एयरग्लो' कहा जाता है। यह पृथ्वी की वह प्राकृतिक आभा है, जो रात के समय आकाश को पूरी तरह अंधेरा होने से बचाती है और हमारे वायुमंडल की जटिल प्रक्रियाओं को दर्शाती है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, एयरग्लो तब होता है जब ऊपरी वायुमंडल में मौजूद एटम और मॉलिक्यूल सूरज की रोशनी से अधिक सक्रिय हो जाते हैं। वे अपनी अतिरिक्त ऊर्जा छोड़ने के लिए फोटॉन के रूप में रोशनी निकालते हैं। यह प्रक्रिया ऑरोरा से मिलती-जुलती है, लेकिन ऑरोरा सोलर विंड के हाई-एनर्जी पार्टिकल्स से बनता है, जबकि एयरग्लो रोजाना की सूरज की सामान्य रोशनी से ऊर्जा लेता है। कभी-कभी आयनाइज्ड एटम फ्री इलेक्ट्रॉन से टकराकर भी रोशनी पैदा करते हैं।

रात का आसमान कभी पूरी तरह काला नहीं होता। लाइट पॉल्यूशन, चांदनी और तारों को हटाकर देखें तो भी हल्की रंगीन चमक दिखती है और यही एयरग्लो है। यह सभी तारों की कुल रोशनी का लगभग दसवां हिस्सा होता है। स्पेस से देखने पर यह पृथ्वी को घेरे एक चमकदार बुलबुले जैसा लगता है। यह 50 से 400 मील की ऊंचाई पर फैला होता है, जहां आयनोस्फीयर स्थित है। इसी इलाके से हमारे जीपीएस सिग्नल गुजरते हैं और एस्ट्रोनॉट्स यहां से यात्रा करते हैं।

एयरग्लो के रंग अलग-अलग गैसों से आते हैं। हरी रोशनी सबसे चमकीली होती है, जो ऑक्सीजन एटम्स से बनती है। लाल और अन्य रंग नाइट्रोजन, ऑक्सीजन के कई रिएक्शन से निकलते हैं। कुछ रंग यूवी और इंफ्रारेड में होते हैं, जो आंखों को दिखाई नहीं देते। ऊपरी वायुमंडल पतला होने से एटम बिना टकराए ज्यादा समय तक उत्तेजित रहते हैं और रोशनी निकाल पाते हैं। निचले हिस्से में घने वायुमंडल में टक्करें ज्यादा होती हैं, इसलिए रोशनी कम बनती है। यह चमक लगातार बदलती रहती है क्योंकि यह सूरज की ऊर्जा और पृथ्वी के मौसम दोनों से प्रभावित होती है।

एयरग्लो आयनोस्फीयर में बदलावों का मार्कर काम करता है , जैसे हवा में धुआं दिखाता है कि हवा कैसे बह रही है, वैसे ही एयरग्लो पार्टिकल्स की गति और मौजूदगी बताता है। इससे तापमान, घनत्व और संरचना की जानकारी मिलती है, जो स्पेस वेदर और पृथ्वी के मौसम के बीच संबंध समझने में मदद करती है।

वैज्ञानिक इस खूबसूरत घटना का लगातार अध्ययन कर रहे हैं क्योंकि यह स्पेस और पृथ्वी के मौसम के जुड़ाव को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आईएसएस से ली गई तस्वीरों में यह रंगीन पट्टियां साफ दिखती हैं, जो वैज्ञानिकों को ऊपरी वायुमंडल की गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता करती हैं।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

Subscribe to our channels on YouTube and WhatsApp 

US-Israel Attacks Iran LIVE: Ayatollah Arafi Appointed to Temporarily Lead Iran After Khamenei’s Death

Hundreds Gather on the Streets of DC; Opinions Sharply Divided on Iran Strikes

Norway’s $2-Trillion Sovereign Wealth Fund Drops Adani Green Energy from Portfolio over Corruption and Financial Crime Allegations

US, Israel Launch Major Strike on Iran; UAE, Qatar, Jordan and Other Middle East Countries Caught in the Crossfire

“Who Committed the Mistake of Giving You a License?”: CJI Pulls Up Lawyer for Filing FIR Against PM Modi and Amit Shah in Connection with CAA