बीआरएस ने अपने नेताओं के अहंकार के कारण खोई सत्ता: कविता 
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बीआरएस ने अपने नेताओं के अहंकार के कारण खोई सत्ता: कविता

IANS

हैदराबाद, 27 नवंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने शुक्रवार को कहा कि बीआरएस को चुनाव में हार का सामना उसके नेताओं के अहंकार और पार्टी द्वारा अपने वादे पूरे न करने के कारण करना पड़ा।

उन्होंने यह प्रतिक्रिया अपने भाई और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) की उस पोस्ट पर दी, जो दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली की अदालत से उन्हें बरी किए जाने के बाद की गई थी।

मीडिया से बातचीत में कविता ने पूछा, “क्या मैं हार की वजह हूं?”

उन्होंने कहा कि बीआरएस की हार का कारण वादे के मुताबिक नौकरियां और घर न देना, तथा ‘लुटेरों’ को दोबारा टिकट देना था। बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी कविता ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात, आपका अहंकारी रवैया ही पार्टी की हार का कारण बना।”

उन्होंने कहा, “आप सच्चाई को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, मेरे भाई। इस तथ्य को मानिए। राजनीति करने के लिए साहस चाहिए। राजनीति में हार को भी स्वीकार करना पड़ता है। चुनाव में क्या हुआ, इसे समझिए और उसी के अनुसार कदम उठाइए।”

कविता ने टिप्पणी की कि केटीआर अदालत के आदेश को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

उन्होंने याद दिलाया कि जब तक वह जेल नहीं गई थीं, तब तक न केसीआर और न ही केटीआर ने उनके समर्थन में कोई प्रेस वार्ता की थी। यहां तक कि बीआरएस के सोशल मीडिया ने भी उनका साथ नहीं दिया।

मार्च 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तारी के समय कविता बीआरएस की एमएलसी थीं। जमानत मिलने से पहले वह पांच महीने से अधिक समय तक जेल में रहीं।

पिछले वर्ष कविता ने बीआरएस छोड़ दी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किए जाने के बाद एमएलसी पद से भी इस्तीफा दे दिया।

कविता ने कहा कि नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने से दो महीने पहले उन्हें क्लीन चिट मिलना भगवान का आशीर्वाद है।

इससे पहले केटीआर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया था कि कथित शराब घोटाले के नाम पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार को गिराया गया और इस नैरेटिव की राजनीतिक कीमत बीआरएस को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में चुकानी पड़ी।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस

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