भारतीय बच्चों की प्राइवेसी खतरे में है? डीपीडीपी एक्ट के तहत डेटा ब्रीच की चिंताओं का आकलन 
National News

भारतीय बच्चों की प्राइवेसी खतरे में है? डीपीडीपी एक्ट के तहत डेटा ब्रीच की चिंताओं का आकलन

IANS

नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। स्कूलों में पढ़ाई के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने नई बहस को जन्म दे दिया है। यह चर्चा अब केवल पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों तक पहुंच गई है। खास तौर पर छात्रों के डेटा के संभावित दुरुपयोग का खतरा वैश्विक स्तर पर एक गंभीर और चिंताजनक सच्चाई के रूप में सामने आ रहा है।

यूएनआरसी, यूनेस्को, यूएनआईसीआरआई और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के ऑफिस समेत कई यूएन के विभागों के एक समूह ने संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में एआई सिस्टम, टूल्स और प्लेटफॉर्म से इकट्ठा किए गए बच्चों के डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी की जरूरत पर जोर दिया गया।

साल 2025 में अमेरिका के टेक्सास में स्थित प्रमुख एडटेक कंपनी पावरस्कूल के खिलाफ बड़े डेटा ब्रीच को लेकर मुकदमा दायर किया गया। कंपनी पर आरोप है कि इस घटना में करीब 6 करोड़ से अधिक छात्रों और 1 करोड़ शिक्षकों की संवेदनशील जानकारी लीक हो गई, जिनमें कई मामलों में सोशल सिक्योरिटी नंबर जैसे निजी विवरण भी शामिल थे। पावरस्कूल एक स्टूडेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम के रूप में काम करती है।

भारत में की गई एक पायलट स्टडी ने भी चिंताजनक तस्वीरें पेश की हैं। इसके अनुसार, भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को मात्र नौ महीनों के भीतर दो लाख से ज्यादा साइबर हमलों और लगभग चार लाख डेटा ब्रीच की घटनाओं का सामना करना पड़ा।

यह वैश्विक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य हाल ही में घोषित प्रथम और एंथ्रोपिक की साझेदारी को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रथम एक गैर-सरकारी संगठन है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि एंथ्रोपिक अमेरिका मुख्यालय वाली एआई कंपनी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित करती है।

दोनों संस्थाओं के बीच हुई इस साझेदारी के तहत एंथ्रोपिक का बड़ा लैंग्वेज मॉडल ‘क्लॉड’ बच्चों के हाथ से लिखे उत्तर, उनकी शैक्षणिक प्रगति से जुड़े डेटा और व्यक्तिगत फीडबैक तैयार करने के लिए आवश्यक सूचनाओं तक पहुंच प्राप्त करता है।

प्रथम-एंथ्रोपिक पार्टनरशिप ने मिलकर फरवरी 2026 में अपने पहले प्रोडक्ट 'एनीटाइम टेस्टिंग मशीन (एटीएम)' का ऐलान किया। एंथ्रोपिक के क्लॉड से पावर्ड, एटीएम करिकुलम-अलाइन्ड टेस्ट बनाता है। स्टूडेंट के हाथ से लिखे जवाबों को डिजिटाइज करता है। इसके अलावा, क्लॉड का इस्तेमाल करके रूब्रिक-बेस्ड ग्रेडिंग अप्लाई करता है और बाइलिंगुअल (हिंदी-इंग्लिश), पर्सनलाइज्ड फीडबैक देता है। भारत के डीपीडीपी एक्ट को देखते हुए असेसमेंट मॉडल में कुछ रिस्क हो सकते हैं।

डीपीडीपी अधिनियम की धारा 9 (1) में यह अनिवार्य है कि डेटा न्यासी को किसी बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के रूप में परिभाषित) के किसी भी व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने से पहले माता-पिता या वैध अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति प्राप्त करनी होगी।

ड्राफ्ट डीपीडीपी नियम, 2025 (नियम 10) ओटीपी-आधारित अभिभावकीय सहमति और सरकार से जारी आईडी के साथ एकीकरण सहित ऐसी सहमति प्राप्त करने के तंत्र पर आगे का मार्गदर्शन प्रदान करता है।

हालांकि, एटीएम द्वारा बच्चों के डेटा का उपयोग करने के मामले में, माता-पिता पूरी तरह से यह नहीं समझ सकते हैं कि उनके बच्चे के हस्तलिखित कार्य की तस्वीरें ली जा रही हैं, क्लाउड-आधारित एआई प्रणाली पर अपलोड की जा रही हैं, अमेरिकी कंपनी के सर्वर द्वारा संसाधित की जा रही हैं और एक बड़े भाषा मॉडल द्वारा विश्लेषण की जा रही हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

Subscribe to our channels on YouTube and WhatsApp 

WhatsApp Tells SC it will Comply with CCI Order on User Data Privacy, Argues Against Blanket Ban on Data Sharing

Gauhati High Court Issues Notice to CM Himanta Biswa Sarma Over Hate Speech Petition, Remarks on “Fissiparous Tendency”

Afghanistan-Pakistan Tensions Escalate After Deadly Border Strikes, 55 Soldiers Killed

Delhi Govt Collects 66 Food Samples Ahead of Holi to Check Adulteration

Indian Batsman Rinku Singh's Father Dies of Cancer